बलात्कार

rape

आदमी को भगवान ने इसलिए जन्मेन्द्रिय दे रखा है कि वह प्रकृति की नियम का पालन करते हुए और जाति की तरह काम वासना पर काबू रखे!भगवान ने इस काम वासना का लगाम इनसान के हाथ मे ही दिया है. पूछो कैसे तो शादी, प्यार बीवी ये सब देकर !फिर वो अपनी कामवासना को इस लगगम के ज़रिए तृप्त क्यों नही कर लेता? क्यों वह अपनी कामवासना के घोड़े पर संवार हुए बिना लगाम के उसके साथ इधर उधर भटकता है?
अगर किसी आदमी को ये अनुभव होता कि उसकी माँ या बहन के साथ भी ऐसा ही एक ‘घुड़सवार’ ने व्यवहार किया था तो उसे कैसा लगता?कुछ इनसान अपने लिए एक नियम और दूसरों के लिए एक नियम क्यों बना लेते हैं? क्या उन्हे यह लगता है वे सरकार और नीतमंडल से बचके आराम से जी पाएँगे?? और अपनी ज़िंदगी का पूरा मज़ा लूटके मरेंगे?? और कोई देखनेवाला और सुन्नेवाला नही होगा? क्या उन्हे ये लगता है कि वे अपने इस घोर पाप से बच पाएँगे? कभी नही! अगर वे यह सोचते हैं इधर के नियम कमज़ोर है और सरकार और नियम दोनों बदलते रहते है और अपने अपने बल दिखाने के लिए आम आदमी को ना गौर करते हुए नियम यूँ ही रद्ध करते है और बनाते है तो वे ग़लत सोचते हैं! अगर वे यह सोचते हैं कि बलात्कार जैसा घोर पाप करने के बाद सरकार और जनता कुछ दिन हुल्ला मचाएँगे , जनता कुछ दिन हर्ताल करेंगे, सरकार उनको फाँसी की सज़ा सुनाएगी और फिर थोड़े दिन जैल मे रखकर फिर छोड़ देगी तो ग़लत सोचते हैं अगर वे यह सोचते हैं कि ना बालिक होने के कारण वे सज़ा से बच पाएँगे तो वे ग़लत सोचते हैं!

इस देश मे देर है अंधेर नही! अगर ऐसा अंधेर संभव हुआ तो भी भगवान के इन्साफ मे देर नही लगती! पलक झपकते ही आदमी की ज़िंदगी मे इधर की उधर हो जाती है!
अगर वह सोचता है कि,क्योंकि वो केंद्र सरकार या संस्था केन्द्र मे है, या कोई धर्म संस्ता मे प्रथम स्थान मे है, और, कोई उसका कुछ नही बिगाड़ सखता , तो वह ग़लत सोचता है! अगर वह यह सोचता है की एक विद्यापक या आचार्य का नकाब पहनकर कोई पाठशाला या कॉलेज मे बच्चे और लड़कियों की इज़्ज़त के साथ खिलवाड़ कर सखता है तो वह ग़लत सोचता है!

हर औरत एक देवी है! अगर वह ऐसा नही बर्ताव करती तो उसे हमे क्या लेना देना? उसकी कोई मजबूरी हो सकती है जिससे वो दिल से या मन से ग़लत काम नही करती हो अपने बच्चों की पालन के लिए करती हो!
एक पाँच या छे साल की बच्चे के आँखों मे देख लेता और उनमे अपने बच्ची या बातीजी नज़र आती तो इनसान उसका बलात्कार नहीं कर पाता!

हे मृगमानुष्य! ना! मृग बोलाना तो मृगों की बेस्ती होगी क्यों की वे कभी बलात्कार नही करते…वह अपने स्वाभाव मे रहते है और एक दूसरे को नुकसान नहीं पहुँचाते और दूसरे की आत्मा को मसलके उसको जीते जी मार नही डालते!
खबरदार! होशियार ! वे सब जो जन्मेन्द्रिय की रहस्य का मान ना रखे! चेतावनी उन सब को जो कामवासना मे उलट-पलटकार बंदर नाच करते है! दुर्गा माता सिर्फ़ पूजा मे नही आती वह सब जगह फैली हुई है; जब जब अच्छेै-बुरे का फ़र्क इनसान भूल जाता है तब तब दुर्गा मा अवतार लेती है और इस देश की हर औरत मे यह अवतार छिपी है!
जो बीत गया सो बीत गया! जो लोग ऐसे बुरे लोगों के कर्म के पात्र बने उन्हे अब दुर्गा मा ही रक्षा करे… उनके आत्मा को अब जगतमाता की हवाले कर ले!
लेकिन अब ऐसा नही होगा! ज़रूरत पढ़े तो हम लड़की और औरत लोग खुद तलवार उठाएँगे ऐसे असुर की वध करने वास्ते!
मेरी यह प्रार्थना है अपने गुरु से, अपने केंद्रिय और राज्य सरकारों से ,अपने नियम बनानेवालों से, , अपने धर्म के टेकेदारों से….. उठाइए अपने शस्त्र और चलाइए अपने बाण ऐसे समाज के विद्रोहियों के खिलाफ!
दया करो! अपनी माँ , अपनी बहन, अपने बच्चे ,हम सब लड़कियाँ और औरतों ही आवाज़ सुनो और ज़रूरत पढ़े तो इस बलात्कार के घोर पाप के लिए खड़ी से खड़ी नियम को कायम करो ताकि ऐसा पापी फिर कभी ऐसा जुर्म करने से पहले हज़ार बार सोचेगा! ऐसे जुरमियों को जल्द से जलद और ऐसा सज़ा दो की दूसरा कोई ऐसे जुर्म करना तो छोड़ो ,ऐसा सोच मे भी नही करेगा! इस देश के जितने बलात्कार के मामले है उन्हे जल्द से जल्द लिपटादीजिए जिससे जनता को सरकार मे भरोसा कायम रहे और ऐसी पापियों को सरकार की इंसाफ़ का ख्वाफ बना रहे!

मेरी यह प्रार्थना सिर्फ़ यह देश चलानेवालों से नहीं! यह प्रार्थना उन सब को भी है जो अब तक सिर्फ़ अपनी आवाज़ को अपने दफ़्तर, पातशाला, परिवार की सीमा मे सुनाते है या आवाज़ उठाके थोड़ी देर के लिए लड़ते हे फिर चुप हो जाते हे! ये आवाज़ तब तब और वहाँ वहाँ उठाइए जहाँ जहाँ औरत की बेस्ती होती है चाहे वो दफ़्तर मे, चाहे वो KSRTC बस मे, चाहे वो राजनीति के मंच पर, और, चाहे वो धर्म के जानी मानी टेकेदारों के बीच मे!. महाभारत मे दुशासन तो एक ही था पर आज के धर्मक्षेत्र युद्ध मे कई दुशासन है! तो क्या हुआ! केशव या कृष्णा के भक्त भी तो बहुत हैं जो उनके वचन के पालन करते हैं!

तो आइए! मैदान मे उतरिए सब लड़कियाँ और औरतों की रक्षा करने क्योंकि इनकी रक्षा करना अपनी माँ, अपनी बहन , अपनी बेटी की रक्षा करना है और अपनी भारत माता की इज़्ज़त को बचाना है!
वो देश ही क्या जो लड़कियों और औरतों को ना सुरक्षित रख पाए? औरत के बिना घर-परिवार तो क्या, यह देश तो क्या, यह श्रीष्टि ही अदूरी है!
जय हिंद! जय भारत माता! जय दुर्गा माता!

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